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Essay On Holi Festival In Hindi Language

होली त्यौहार पर निबंध और महत्व Essay on Holi Festival in Hindi

क्या आप होली त्यौहार के महत्व, इतिहास, तारीख और उत्सव के विषय में जानना चाहते हैं?
क्या आप भारतीयत्यौहार होली के विषय में जानना चाहते हैं?

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होली त्यौहार पर निबंध और महत्व Essay on Holi Festival in Hindi

विषय सूचि

होली पर निबंध Essay on Holi in Hindi

आप तो जानते ही हैं होली का त्यौहार भारत के हर एक क्षेत्र में खुशियों का रंग ले कर आता है। हर घर में यह त्यौहार खुशियों के रंग बिखेर देता है इसलिए इस त्यौहार को रंगों का त्यौहार कहा जाता है।

इस त्यौहार से लोगों के बिच प्रेम बढ़ता है और सभी मिल झूल कर इस दिन का आनंद उठाते हैं। यह एक पारंपरिक और सांस्कृतिक हिंदू त्योहार है जीको मनाने के लिए लोग बहुत ही उत्साह के साथ इस दिन का इंतज़ार करते रहते हैं।

होली का त्यौहार कई पीढ़ियों से मनाया जा रहा है और दिन ब दिन इसकी विशेषता और आधुनिकता बढ़ता चला जा रहा है।

होली त्यौहार का महत्व Importance of Holi festival in Hindi

होली रंगों और प्रेम का त्यौहार है। यह प्रतिवर्ष हिन्दुओं द्वारा मनाया जाने वाला एक बहुत ही बड़ा पर्व है। इस दिन को लगभग पुरे भारत में लोग बहुत ही धूम धाम से मनाते हैं।

यह त्यौहार लोगों में जोश और उमंड सा भर देता है। इससे लोगों के बिच की दूरियां ख़त्म होती हैं और उनके बिच प्यार बढ़ता है। लोग इस त्यौहार को अपने रिश्तेदारों, परिवार जानो ओर दोस्तों के साथ मिल कर बहुत ही हर्ष उल्लास के साथ मनाते हैं।

इस दिन लोग लाल गुलाल को प्यार और लगाव का प्रतिक मानते हैं इसीलिए सबसे पहले लाल रंग के गुलाल को एक दुसरे पर लगते हैं। इस दिन सभी लोगो को एक सुन्दर मजेदार छुट्टी का दिन मिलता है।

लोग इस दिन एक दुसरे को पिचकारियो और रंग भरे हुए गुब्बारों को एक दुसरे पर मारते हैं और रंगों में नाहा जाते हैं। इस दिन लोग अपने घरों में गुजिया, मालपुआ और कई प्रकार के स्वादिष्ट मिठाइयाँ बनाते हैं

होली का त्यौहार भारत के साथ-साथ नेपाल में भी मनाया जाता है। यह त्यौहार बहुत ही रस्मों रिवाजों से मनाया जाता है। होली के दिन शाम को सभी परिवार के लोग और रिश्तेदार एक साथ होलिका जलाते हैं और मिल कर उसके चारों और पारंपरिक गीत गाते हैं और नाचते हैं।

यह माना जाता है की होली की शाम जो कोई भी होलिका जला कर पारंपरिक रूप से रस्म निभाता है उसके जीवन की सभी बुरी नकारात्मक चीजें दूर हो कर एक सकारात्मक चीजों को शुरुवात होती है।

2018 होली कब है? When is Holi in 2018?

होली 2 मार्च 2018, शुक्रवार को भारत और पुरे विश्व भर में मनाया जायेगा।

हिन्दू कलेंडर के अनुसार, होली का त्यौहार प्रतिवर्ष फरवरी या मार्च के महीने में पूर्ण चन्द्रमा के दिन, फागुन पूर्णिमा पर होता है। होली के दिन को बुराई पर अच्छाई के विजय की ख़ुशी में मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने सभी समस्याओं को भूला कर, खेलते हैं, हसतें हैं, ख्सुशियाँ मनाते हैं और अपने रिश्ते को और मजबूत बनाते हैं।

होली का त्यौहार अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग प्रकार से मनाया जाता है। पूर्णिमा (पूर्ण चन्द्रमा के दिन) पहले दिन के होली को होली पूर्णिमा के नाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग एक दुसरे को रंग लगा कर मनाते हैं। दुसरे दिन को पूनो कहते हैं इस दिन मुहूर्त के अनुसार होलिका दहन किया जाता है।

होली क्यों मनाया जाता है? Why is Holi Celebrated?

होली के त्यौहार को प्रतिवर्ष मनाने के कई कारण हैं, जैसे –

  • सबसे पहला इस दिन को बुराई पर अच्छाई के विजय के कारण मनाया जाता है।
  • फागुन माह के आगमन पर होली मनाया जाता है इसलिय इसका एक और नाम फग्वाह भी रखा गया है।
  • होली शब्द ‘होला’ शब्दसे लिया गया है जिसका अर्थ होता है भगवान् की पूजा करना ताकि अच्छा फसल हो।
  • होली का त्यौहार भी दीपावली की तरह ही एक पौराणिक त्यौहार है जो कई वर्षों से मनाया जा रहा है। प्राचीन काल के मंदिरों के दीवारों पर भी होली त्यौहार के मनाने के सबुत पाए गये हैं।
  • होली दोल पूर्णिमा के अगले दिन मुख्य तौर पर ओडिशा और पश्चिम बंगाल में मनाया जाता है। इस दिन को दोल जात्रा के नाम से भी जाना जाता है।

मथुरा और वृन्दावन का होली त्यौहार Holi Celebration in Mathura and Vrindavan

मथुरा और वृन्दावन में होली का त्यौहार बहुत प्रसिद्ध है। इस दिन को उत्साह से मनाने के लिए लोग भारत के अन्य शहरों से इस दिन मथुरा और वृन्दावन आते हैं। मथुरा और वृन्दावन वो पवित्र स्थान हैं जहाँ भगवान् श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। इतिहस के अनुसार होली का त्यौहार राधा कृष्ण के समय से मनाया जा रहा है।

होली के अवसर पर यहाँ पूरा हफ्ता कई प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाते हैं। वृन्दावन के बांके बिहारी मदिर में महा होली उत्सव मनाया जाता है और होली मथुरा के ब्रज में गुलाल कुंड में बेहतरीन रूप से मनाया जाता है। यहाँ पर कृष्ण लिली नाटक भी आयोजित किये जाते हैं।

होली त्यौहार का इतिहास History of Holi festival in Hindi

होली बहुत ही सांस्कृतिक और पारंपरिक मान्यताओं का त्यौहार है जो बहुत ही पौराणिक काल से मनाया जा रहा है। होली का वर्णन कई भारतीय पवित्र किताबों जैसे पुराणों, रत्नावली में किया गया है।

होली के दिन विवाहित महिलाएं पूर्ण चन्द्रमा के इस दिन को अपने परिवार के सुख समृद्धि के लिए भगवान की पूजा करते है।

होली के त्यौहार को मनाने का एक अलग ही स्वास्थ्य लाभ भी है। इससे लोगों की चिंता दूर होती है और तंदरुस्ती आती है।

आज लाक होली के त्यौहार पर लोग अपने दूर बैठे मित्रों और परिवारजनों को WhatsApp, Facebook, एनी Social Media पर Happy Holi Messages और Quotes भी भेजते हैं।

होली- रंगों का त्योहार


'होली' एक महत्वपूर्ण भारतीय त्योहार है। यह पर्व हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह त्योहार मुख्य रूप से हिन्दू या भारतीय मूल के लोगों के साथ साथ भारत, नेपाल तथा विश्व के अन्य क्षेत्रों में मनाया जाता है।

होली के पर्व से अनेक कहानियाँ जुड़ी हुई हैं। इनमें से सबसे प्रसिद्द कहानी है प्रहलाद की। माना जाता है कि प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक अत्यंत बलशाली असुर था। उसने अपने राज्य में ईश्वर का नाम लेने पर ही पाबंदी लगा दी थी। अपने पुत्र प्रहलाद की ईश्वर भक्ति से क्रुद्ध होकर हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को आदेश दिया कि प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठे। होलिका को वरदान प्राप्त था कि वह आग में भस्म नहीं हो सकती। हिरण्यकश्यप के आदेशानुसार आग में बैठने पर होलिका तो जल गई पर प्रहलाद बच गया। ईश्वर भक्त प्रहलाद की याद में इस दिन होली जलाई जाती है।

रंगों का त्योहार कहे जाना वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते हैं। दूसरे दिन, जिसे धुरड्डी, धुलेंडी, धुरखेल या धूलिवंदन कहा जाता है, लोग एक-दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजाकर होली के गीत गाये जाते हैं, और घर-घर जाकर लोगों को रंग लगाया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक-दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान करके विश्राम करने के बाद नए कपडे पहन कर शाम को लोग एक-दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और गुझिया एवं मिठाइयाँ खाते हैं। 


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